ज्योतिषशास्त्र प्रवर्तका:

 भारतीय ज्योतिष शास्त्र के मूल स्तंभ के रूप में 18 महर्षियों/आचार्यों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें ज्योतिष के प्रवर्तक या प्रणेता माना जाता है। ये ऋषि हैं: ब्रह्मा, सूर्य, वशिष्ठ, अत्रि, पराशर, कश्यप, नारद, गर्ग, मरीचि, मनु, अंगिरा, लोमश (रोमक), पुलस्त्य (पौलिश), च्यवन, यवन, भृगु, शौनक और व्यास। 


ज्योतिष शास्त्र के 18 प्रमुख प्रवर्तक:
  1. ब्रह्मा: ज्योतिष विद्या के ज्ञान को सर्वप्रथम प्रकट करने वाले।
  2. सूर्य: सूर्य सिद्धांत के प्रतिपादक।
  3. वशिष्ठ: वशिष्ठ सिद्धांत के ज्ञाता।
  4. अत्रि: ऋषि अत्रि ज्योतिष के प्राचीन आचार्य।
  5. पराशर: होरा शास्त्र (फलित ज्योतिष) के रचयिता 
  1. कश्यप: ज्योतिषीय गणनाओं के ज्ञाता।
  2. नारद: नारद संहिता के रचयिता।
  3. गर्ग: गर्ग संहिता, ज्योतिष के प्राचीन जानकार।
  4. मरीचि: खगोलीय विद्या के ज्ञाता।
  5. मनु: वैदिक ज्योतिष के प्रवर्तक।
  6. अंगिरा: ज्योतिष विद्या के प्राचीन ऋषि।
  7. लोमश (रोमक): रोमक सिद्धांत के रचयिता।
  8. पुलस्त्य (पौलिश): पौलिश सिद्धांत के प्रतिपादक।
  9. च्यवन: भृगु संहिता के साथ जुड़े ऋषि।
  10. यवन: यवनजातक (ज्योतिषीय ग्रंथ) के ज्ञाता।
  11. भृगु: भृगु संहिता के रचयिता।
  12. शौनक: ज्योतिष और खगोल के जानकार।
  13. व्यास: वैदिक ज्योतिष के प्रणेता। 
इन आचार्यों ने ज्योतिष की विभिन्न शाखाओं (गणित, संहिता, होरा) की नींव रखी है।

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