नाड़ी

 योग और आयुर्वेद में नाड़ी (शरीर की ऊर्जा चैनल) की शुद्धि और ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। घेरण्ड संहिता के अनुसार नाड़ी शुद्धि का श्लोक यह है: 


नाड़ीशुद्धिं समासाद्य प्राणायामं समभ्यसेत् ।।(अर्थ: नाड़ी शुद्धि प्राप्त करने के बाद ही प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।) 

प्रमुख नाड़ी (इड़ा, पिंगला, सुषुम्णा) से संबंधित ज्ञान:शिव स्वरोदय के अनुसारशुक्लपक्षे द्वितीयायामर्के वहति चन्द्रमा: !दृश्यते लाभद: पुसां सौम्ये सौख्यं प्रजायते !!(अर्थ: शुक्ल पक्ष की द्वितीया को सूर्योदय के समय यदि चन्द्र नाड़ी (इड़ा) चले तो यह लाभप्रद और सुखद होती है।) 

नाड़ी शुद्धि का महत्व:प्राणायाम करने से पहले साधक को कुश या कम्बल के आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके नाड़ी शुद्धि करनी चाहिए।

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