नवविध कालमान
सूर्य सिद्धान्त के अनुसार ज्योतिष में समय की गणना के नौ प्रकार (नवविध कालमान) वर्णित हैं: ब्राह्म, दिव्य, प्राजापत्य, प्राजापत्य, गौरव, सौर, चान्द्र, नाक्षत्र, और सावन। ये कालमान सूक्ष्म (अमूर्त) से लेकर स्थूल (मूर्त) समय तक, मनुष्यों से लेकर ब्रह्मा तक के समय की गणना का आधार हैं।
नवविध कालमान का विवरण:
- ब्राह्ममान (Brahmamaana): ब्रह्मा के अहोरात्र (दिन-रात) पर आधारित समय।
- दिव्यमान (Divyamaana): देवताओं के दिन-रात पर आधारित समय, जहाँ 1 वर्ष = 1 दिव्य दिवस।
- पैत्र्यमान (Paitryamaana): पितरों का समय, जो चान्द्र मास के अनुसार होता है।
- प्राजापत्यमान/मनुमान (Prajapatyamaana): मनु और प्रजापति की गणना से संबंधित काल।
- गौरवमान/बार्हस्पत्यमान (Bahaspatyamaana): बृहस्पति की गति पर आधारित समय।
- सौरमान (Sauramaana): सूर्य के राशि संक्रमण पर आधारित समय (वर्ष)।
- चान्द्रमान (Chandramaana): चंद्रमा की कलाओं/तिथियों पर आधारित समय।
- नाक्षत्रमान (Nakshatramaana): नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार समय।
- सावनमान (Saavanamaana): एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय का समय (दिन)।
- विशेष संदर्भ: मानव जीवन और व्यावहारिक ज्योतिष (पंचांग) में मुख्यतः सौर, चान्द्र, नाक्षत्र और सावन मान का उपयोग किया जाता है।
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